गांधी-शास्त्री जयंती पर अदनान फाउंडेशन की विचार गोष्ठी
धानापुर, चंदौली। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर अदनान फाउंडेशन द्वारा गुरुवार को कस्बा स्थित थाना चौराहे पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रबंध न्यासी एम. अफसर खान 'सागर' ने की।
गोष्ठी में वक्ताओं ने दोनों महापुरुषों के जीवन मूल्यों, उनके योगदान और देशभक्ति की भावना पर विस्तार से चर्चा की।
एडवोकेट उपेंद्र कन्नौजिया ने कहा कि महात्मा गांधी ने सत्य और अहिंसा के बल पर न केवल अंग्रेज़ी हुकूमत को चुनौती दी, बल्कि पूरी दुनिया को यह सिखाया कि बिना हिंसा के भी बड़े से बड़ा बदलाव संभव है। उनका जीवन तप, त्याग और सेवा की मिसाल है। आज जब समाज हिंसा और असहिष्णुता की ओर झुक रहा है, तब गांधीजी के विचारों को आत्मसात करना और भी ज़रूरी हो गया है।
उन्होंने आगे कहा, पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी का जीवन सादगी और ईमानदारी की मिसाल था। प्रधानमंत्री बनने के बाद भी उन्होंने सत्ता को सेवा का माध्यम माना। ‘जय जवान, जय किसान’ का नारा केवल एक वाक्य नहीं था, बल्कि उस दौर के भारत की ज़रूरतों और चुनौतियों को दिशा देने वाला सूत्र था। शास्त्री जी का संदेश आज भी किसानों और जवानों के संघर्ष को सम्मान देने की प्रेरणा देता है।
एम. अफसर खान 'सागर' ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि गांधी और शास्त्री दोनों महापुरुषों की जयंती पर हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम उनके दिखाए मार्ग पर चलकर देश और समाज की बेहतरी के लिए काम करेंगे। गांधीजी का सत्याग्रह केवल राजनीतिक हथियार नहीं था, बल्कि वह समाज सुधार का भी माध्यम बना। शास्त्री जी का सादा जीवन यह सिखाता है कि सच्ची शक्ति त्याग और ईमानदारी में है।
गोष्ठी में उपस्थित सभी लोगों ने गांधी और शास्त्री जी के विचारों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लिया और देश सेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। कार्यक्रम में मो. आरिफ, रामनरायण, आकाश, सरताज, सरफुद्दीन, गोलू, अभिजीत सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
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