घर आंगन की चहक गौरैया को बचाना जरूरी

अदनान फाउण्डेशन द्वारा विश्व गौरैया दिवस पर 'घर आंगन की चहक रहे बरकरार' विषयक गोष्ठी का हुआ आयोजन। 


धानापुर-चन्दौली। अदनान फाउण्डेशन द्वारा शनिवार को विश्व गौरैया दिवस पर कस्बा स्थित कैम्प कार्यालय पर गौरैया संरक्षण का संकल्प लेते हुए 'घर आंगन की चहक रहे बरकरार' विषयक गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में विलुप्त हो रही गौरैया के प्रति चिंता व्यक्त की गई और उन्हें बचाने की शपथ ली गई।
अदनान फाउण्डेशन के संस्थापक व प्रबन्ध निदेशक एम. अफसर खान सागर ने कहा कि गौरैया घर आंगन की रौनक बढ़ाने वाली पक्षी है। यह खुशहाली और उल्लास का प्रतीक है। इसकी हिफाजत करना हम सबकी जिम्मेदारी है। कुछ साल पहले तक गौरैया का झुंड बड़ी आसानी से घरों, गाँव, खेत-खलिहान व सार्वजनिक स्थलों पर बड़ी आसानी से दिख जाते थे मगर अफसोस गौरैया आज संकटग्रस्त पक्षी की श्रेणी में आ गई है, जो पूरे विश्व में तेजी से कम हो रही है। कभी कच्चे घर, पशुशाला और आंगन गौरैया के आशियाना होते थे अब ये सब भौतिकता के भेंट चढ़ गए। उन्होंने कहा कि शहरीकरण ने हमारे गाँव की दहलीज को अपने गिरफ्त में ले लिया है, जिस वजह से हमारे गाँव के कच्चे मकान, दालान और खुलापन, हरियाली सब धीरे-धीरे संकुचित होती गई और इस पक्षी के आशियाने व भोजन के स्रोत कंक्रीट की भेंट चढ़ती गयी।
 

 
उन्होंने कहा कि गौरैया महज एक चिड़िया ही नहीं है बल्कि यह मानव सभ्यता का एक हिस्सा है और हमारे गाँव व शहरों के स्वस्थ वातावरण की सूचक भी है। गौरैया को बरसात होने का संकेत देने वाली चिड़िया के रूप में भी माना जाता है। इसलिए आज हम सबकी जिम्मेदार है घर आंगन की चहक-फुदक और पर्यावरण मित्र गौरैया को संरक्षित करने और उसे बचाने की। आवश्यकता है इनके लिए घर आंगन में, सार्वजनिक स्थलों, छतों पर बर्तन में पानी व दाना का इंतजाम किया जाए तथा पक्के मकानों में गौरैया के लिए कृत्रिम घोंसले, घर रखे जाएं। इसके साथ ही लोगों को इसके लिए जागरूक व प्रेरित करने की जरूरत है।
 

 
आगामी दिनों में फाउण्डेशन द्वारा गौरैया संरक्षण हेतु विविध कार्यक्रम चलाने का निर्णय लिया गया। गोष्ठी में मुख्य रूप से इसरारुल हक, एड. उपेन्द्र कन्नौजिया, रियाज खान, नसीरूल होदा खान राजा, पौदीनै प्रजापति, मो0 आरिफ, आमीर सुहेल, एहतशाम खान शेरू, इम्तियाज अहमद, राधेश्याम, आसिफ आदि लोग मौजूद रहे।

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