जल की बर्बादी से मानव सभ्यता पर गहरा सकता है संकट
विश्व जल दिवस पर अदनान फाउण्डेशन की 'जल है तो कल है' विषयक गोष्ठी
धानापुर-चंदौली। अदनान फाउण्डेशन द्वारा सोमवार को कस्बा स्थित कैम्प कार्यकाल पर विश्व जल
दिवस पर जल है तो कल है विषयक गोष्ठी आयोजित की गई।
एडवोकेट
उपेन्द्र कन्नौजिया ने कहा कि जल ही समस्त भौतिक वस्तुओं का कारण और समस्त
प्राणी जीवन का आधार है, परंतु अफसोस के साथ कहना होगा कि पूरी दुनिया तब
से अब तक इस अमूल्य धरोहर को सहेजने में विफल रही है। आज जरूरत है जल को
बचाने और इसके बेहतर उपयोग की। उन्होंने कहा कि दुनिया को पानी बचाना कितना
जरूरी है, इस बात का इसी से अंदाज लगा सकते हैं कि यह हमारा मूलभूत संसाधन
है, इससे कई काम संचालित होते हैं और इसकी कमी से ज्यातार क्रिया कलाप ठप
हो सकते हैं। अस्तित्व पर संकट गहरा सकता है।
फाउण्डेशन
के प्रंबधन निदेशक एम. अफसर खान सागर ने कहा कि हमें जल के महत्व को समझने
की जरूरत है। पृथ्वी का तकरीबन 71 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा पानी से भरा
है लेकिन मीठे जल की मात्रा काफी कम है। एक अध्ययन के मुताबिक दुनिया में
10 में से 2 व्यक्तियों को पीने का साफ पानी नहीं मिलता। वहीं दूसरी तरफ
दिल्ली, मुंबई और चेन्नई में पाइप लाइनों के वॉल्व खराब होने के कारण 17 से
40 प्रतिशत पानी बेकार बह जाता है। इसलिए हमें पानी का इस्तेमाल बहुत ही
समझदारी से करना है। इस साल विश्व जल दिवस का थीम है वेल्यूइंग वाटर यानी
जल को महत्व देना। इसका मतलब ये है कि कोई भी व्यक्ति पानी को जरा सा भी
बर्बाद न करे तभी हम उसका संरक्षण करने में कामयाब हो सकेंगे। वर्ना जल की
बर्बादी से मानव सभ्यता पर संकट मंडरा सकता है। उन्होंने कहा कि हमें याद
रखना है कि जल संकट का हल सिर्फ जल संरक्षण से ही मुमकिन है। इंसान हों या
जानवर सबके जीवन से जुड़े ज्यादातर कार्यों के निष्पादन के लिए जल जरूरी है।
इसलिए जल संरक्षण और जल का जरूरत के हिसाब से इस्तेमाल और जल की बर्बादी
को रोकने के लिए हमें ठोस पहल की आवश्यकता है ताकि हम जल को बचा कर आने
वाली पीढ़ी के लिए सुरक्षित रख सकें।
इस दौरान मुख
रूप से इम्तियाज अहमद, मुकेश मौर्या, तबरेज खान, शहंशाह खान, सतीश, मो.
आरिफ, विवेक कौशल, नसीरूल होदा राजा, अयान खान, एहतशाम खान, रागिब आदि
मौजूद रहें।


टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें