भाषा से बढ़कर, भावनाओं का पर्व है हिन्दी दिवस - एम. अफसर खान
धानापुर चन्दौली (उत्तर प्रदेश)। अदनान फाउंडेशन द्वारा संचालित धानापुर साहित्यिक मंच ने रविवार को कस्बा स्थित पठानटोली में हिंदी दिवस को सिर्फ़ एक औपचारिक कार्यक्रम न बनाकर, उसे एक संवेदना और संकल्प का उत्सव के रूप में मनाया।
समारोह में जब स्थानीय साहित्यकार, शिक्षाविद, समाजसेवी और युवा एक साथ जुटे तो लगा मानो भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि दिलों को जोड़ने वाला पुल है। पूरे आयोजन का माहौल हिंदी की मिठास और साहित्यिक गरिमा से सराबोर रहा।
एम. अफसर खान 'सागर' ने कहा कि हिंदी सिर्फ़ हमारी मातृभाषा नहीं, यह भारतीयता की आत्मा है। हमें चाहिए कि इसे रोज़मर्रा की ज़िंदगी और शिक्षा में पूरी शिद्दत से अपनाएँ। तभी आने वाली पीढ़ियाँ अपनी भाषा पर गर्व महसूस करेंगी। हिंदी की सबसे बड़ी ताक़त उसकी सरलता और आत्मीयता है, जो देश को एक सूत्र में पिरोती है। उन्होंने कहा कि हिन्दी दिवस केवल तारीख़ पर मनाया जाने वाला पर्व नहीं, बल्कि यह हमारी आत्मा और अस्मिता को बचाने का संकल्प है। हमें इसे नई पीढ़ी तक सौंपना ही सबसे बड़ा धर्म है।
इस अवसर पर डॉ अरविन्द मिश्र, राजीव कुमार, इसरारुल हक, अशफाक खान, मो. आरिफ, शमशाद, कलाम खान, तबरेज खान, वसी खान सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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